જૈનીઝમ કોર્સ : વર્ષ ૧ : ભાગ ૦૩

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Alpesha Shah
Participant
Dec 12, 2020 03:55 PM

punya paap aashrav ne bandh rupi kai rite plz explian aashrav nirjara ne bandh arupie kai rite

Keymaster
Dec 16, 2020 04:56 PM

यद्यपि पूण्य-पाप-आश्रव-संवर आदि तत्त्वों का कोई स्वतंत्र स्वरूप नहीं है अतः इन तत्त्वो के रुपी-अरुपीपन की विवक्षा वह तत्त्व किस के परिणाम स्वरुप है उस पर निर्भर करती है | अन्ततो गत्वा यह सभी तत्त्व जीव के तथा कर्म पुद्गल स्वरुप अजीव के ही परिणाम स्वरुप है | क्योंकि कर्म पुद्गलो का जीव के साथ मिश्रित होना ही बंध, पुण्य, पाप, आश्रव तत्त्व है जो कर्म का परिणाम है ,तथा जीव का कर्म पुद्गलो से मुक्त होना ही संवर, निर्जरा, मोक्ष तत्त्व है, जो जीव का परिणाम है | जीव तत्त्व शुद्ध आत्मद्रव्य स्वरूप होने से अरूपी है तथा कर्म द्रव्य पुद्गल परमाणु के स्कंध स्वरूप होने से रूपी है | अत: पुण्य, पाप, आश्रव और बंध, ये चार तत्व कर्म- परिणाम होने से रूपी है , तथा संवर, निर्जरा और मोक्ष, ये तीनों जीव के परिणाम होने से अरूपी है |

Keymaster
Dec 16, 2020 04:59 PM

यहा पर जिसमें रूप, रस, गंध व स्पर्श पाये जाते हैं, वह पदार्थ रूपी कहलाता है तथा जिसमें इन चारों का अभाव हो, वह अरूपी कहलाता है।

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